Wednesday, 17 December 2014

मासिक धर्म चक्र क्या है

10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।
माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।
मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?
हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।
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माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?
एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।
सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?
भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।
पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?
पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)
पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?
श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।
पैड को कैसे फेंकना चाहिए?
पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं।


Monday, 15 December 2014

About us

मेरा नाम राज देव हैं और मैं Jkhealthworld.com संस्था से जुड़ा हुआ हूं। यह एक ऐसी संस्था है जो स्वास्थ्य से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराती है। मैं Jkhealthworld.com द्वारा स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी को ही इस ब्लॉक के द्वारा उन स्त्रियों तक पहुचाने का काम करता हूं जो अपने समस्याओं के बारे खुल कर बात नहीं कर पाती। मैं इस ब्लॉग द्वारा स्त्री रोग संबंधित सभी समस्या के बारे में जानकारी देने का एक छोटा सा प्रयास किया है। स्त्री संबंधी सभी रोग जैसे- प्रदर, बांझपन, मासिकधर्म की परेशानी, स्तन रोग, योनि के रोग, गर्भाशय की प्रोबलम्स, हिस्टीरिया आदि। इस ब्लॉक का एक मात्र उद्देश्य है स्त्रियों को स्त्री रोग के बारे में जागरूक करना ताकि वे स्वस्थ रह सकें।

स्त्रियों में श्वेतप्रदर और उसका उपचार

स्त्रियों में श्वेतप्रदर रोग आम बात है ये गुप्तांगों से बहने वाला पानी जैसा स्त्राव होता है य़ह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है इसके लिये सबसे पहले जरूरी है साफ सफाई,कब्ज दूर करना,चाय, मैदे की चीजें न खायें ,तली चीजें न खायें। ताजी सब्जियां फल अवश्य खायें काम ,क्रोध,ऊद्वेग से बचें।
http://jkhealthworld.com/hindi/स्त्री-रोग

श्वेत प्रदर (Leucorrhoea) का उपचार
  •  श्वते प्रदर में पहले तीन दिन तक अरण्डी का 1-1 चम्मच तेल पीने के बाद औषध आरंभ करने पर लाभ होगा। श्वेतप्रदर के रोगी को सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • पहला प्रयोगः आश्रम के आँवला-मिश्री के 2 से 5 ग्राम चूर्ण के सेवन से अथवा चावल के धोवन में जीरा और मिश्री के आधा-आधा तोला चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।
  • दूसरा प्रयोगः पलाश (टेसू) के 10 से 15 फूल को 100 से 200 मि.ली. पानी में भिगोकर उसका पानी पीने से अथवा गुलाब के 5 ताजे फूलों को सुबह-शाम मिश्री के साथ खाकर ऊपर से गाय का दूध पीने से प्रदर में लाभ होता है।
  • तीसरा प्रयोगः बड़ की छाल का 50 मि.ली. काढ़ा बनाकर उसमें 2 ग्राम लोध्र चूर्ण डालकर पीने से लाभ होता है। इसी से योनि प्रक्षालन करना चाहिए।
  • चौथा प्रयोगः जामुन के पेड़ की जड़ों को चावल के मांड में घिसकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम देने से स्त्रियों का पुराना प्रदर मिटता है।
  • कच्चे केले की सब्जी खायें,दो केले शहद में डालकर खायें।
  • गर्मी के दिनों में फालसा खूब खायें शरबत पियें।
  • कच्चा टमाटर खायें।
  • सिंघाडे के आटे का हलुआ , तथा इसकी रोटी खायें लाभ होगा।
  • अनार के ताजे पत्ते अगर मिल जाय तो25,30,पत्ते 10,12,काली मिर्च साथ में पीस ले उसमें आधा ग्लास पानी डालें फिर छान कर पी जायें ,सुबह शाम।
  • 100ग्राम,धुली मूंग तवे पर हल्का भूनकर पीस कर रख लें फिर दो मुठठी चावल एक कप पानी में भिगा दें मूंग दाल चूरण को चावल के पानी में डाल कर पीजायें।श्वेत प्रदर में फायदा होगा।
  • भुना चना में खांण्ड(गुड़ की शक्कर) मिलाकर खायें,बाद में एक कप दूध में देशी घी डालकर पियें लाभ होगा।
  • जीरा भूनकर चीनी के साथ खायें।
  • फिटकरी के पानी से गुप्तांगों को अंदर तक धोयें,सुबह शाम।
  • 10ग्रा. सोंठ एक कप पानी में काढा बनाकर पियें करीब एकमाह।
  • एक ग्राम कच्ची फिटकरी एक केले को बीच में से काटकर भर दें इसे दिन या रात में एक बार खायें,सात दिन में प्रदर ठीक होगा।
  • एक बडा चम्मच .तुलसी का रस,बराबर शहद लेकर चाट जायेंसुबह शाम आराम होगा ।
  • 3ग्राम शतावरी या सफेद मूसली, 3ग्रा.मिस्री इसका चूरण सुबह शाम गर्म दूध से लें।इससे रोग तो दूर होगा ही साथ कमजोरी भी दूर हो जायेगी।
  • माजू फल ,बडी इलायची,मिस्री समान मात्रा में पीसलें एक हफ्ते तक दिन में तीन बार लें ।बाद में दिन में एक बार 21,दिन तक लें लाभ होगा।
  • शुबह शाम दो चम्मच प्याज का रस बराबर मात्रा में शहदमिलाकरपिये।
  • नागरमोथा,लाल चंदन,आक काफूल ,अडूसा चिरायता,,दारूहल्दी,रसौता ,हरेक को25ग्रा.पीस लें तीन पाव पानी में उबालें जब आधा रह जाय तो छानकर उसमें 100ग्रा.शहद मिलाकर दिन में दो बार 50-50ग्रम लेने से हर प्रकार का प्रदर ठीक होताहै।
  • पीपल के दो चार कोमल पत्ते लेकर कूटपीसकर लुग्दी बनाकर दूध में उबालकर पीने से स्त्रियों के अनेक रोग दूर हो जाते है जैसे मासिक धर्म की अनियमितता तथा प्रदर रोग ।